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Toggleजीवन क्या है?
जीवन जीना और अनुभव करना तो आसान है, पर उसे काटना बहुत कठिन। जीवन कोई ऐसा प्रश्न नहीं है जिसका कोई सरल या एकमात्र उत्तर उपलब्ध हो। जीवन को परिभाषित करना न केवल कठिन है, बल्कि शायद नामुमकिन भी है। पृथ्वी पर असंख्य जीव हैं और सभी का जीवन एक-दूसरे से भिन्न है। सभी के अनुभव अलग-अलग हैं और इसी कारण जीवन की परिभाषा भी सबकी अपनी-अपनी है।
प्रत्येक जीव अपने अनुभवों, परिस्थितियों और कर्मों के परिणामस्वरूप जीवन को समझता है। जीवन को केवल जिया जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है, महसूस किया जा सकता है—पर पूरी तरह परिभाषित करना बहुत कठिन है। जीवन तो जीवों के भीतर छिपा है, इसलिए वह परिभाषाओं से बाहर है। यह प्रश्न कुछ ऐसा ही है जैसे मछली से पूछा जाए कि सागर क्या है।
जीवन क्यों है?
जीवन: एक अबूझ पहेली
जीवन की समस्या
वास्तव में जीवन में कोई समस्या नहीं है। सारी समस्याएँ मनुष्य की बनाई हुई हैं। यह ऐसा ही है जैसे कोई व्यक्ति अपने चारों ओर लोहे की मजबूत छड़ें गाड़ ले और फिर चिल्लाए—“बचाओ, बचाओ!” यह समस्या नहीं, बल्कि मूर्खता है।
जब मनुष्य असीम को सीमाओं में बाँधने की कोशिश करता है, तो पीड़ा होना स्वाभाविक है। सारी समस्याएँ मनुष्य की अपनी रचना हैं। मनुष्य के अलावा पृथ्वी पर कोई भी प्राणी दुखी नहीं है, क्योंकि न उनका अतीत होता है और न भविष्य। उनका जीवन केवल वर्तमान में होता है—यहीं और अभी।
मनुष्य या तो अतीत में जीता है या भविष्य में। जबकि जीवन केवल और केवल वर्तमान में है। जो अभी और यहीं है, वही जीवन है। मनुष्य का दुःख इसी कारण है कि वह उस जगह जी रहा है जो अस्तित्व में ही नहीं है, और जो है उसे देख नहीं पा रहा। यही सबसे बड़ी विडंबना है।
सहज और सरल जीवन
निष्कर्ष
